‘सतलुज’ पर नया विवाद: रिलीज़ के 2 दिन बाद ही Zee5 से हटाई गई दिलजीत दोसांझ की फिल्म, आखिर क्या है पूरा मामला?

नई दिल्ली: पंजाबी सुपरस्टार दिलजीत दोसांझ की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘सतलुज (Satluj)’ एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। कई वर्षों तक सेंसर और रिलीज़ संबंधी चुनौतियों का सामना करने के बाद जब फिल्म आखिरकार OTT प्लेटफॉर्म Zee5 पर रिलीज़ हुई, तो दर्शकों को लगा कि इसका लंबा इंतज़ार खत्म हो गया है। लेकिन रिलीज़ के महज़ दो दिन बाद फिल्म को भारत में प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। Join Telegram For Fast Update Join इस अप्रत्याशित कदम ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि वर्षों तक संघर्ष करने वाली यह फिल्म रिलीज़ के तुरंत बाद ही दर्शकों की पहुंच से बाहर हो गई? आइए जानते हैं पूरी कहानी। रिलीज़ के दो दिन बाद क्यों हटाई गई ‘सतलुज‘? रिपोर्ट्स के अनुसार, 3 जुलाई 2026 को Zee5 पर स्ट्रीम हुई ‘सतलुज‘ को भारत में अचानक हटा दिया गया। प्लेटफॉर्म ने बताया कि फिल्म फिलहाल उपलब्ध नहीं है और इसे दोबारा उपलब्ध कराने के लिए कानूनी विकल्पों पर काम किया जा रहा है। हालांकि, हटाने के पीछे किसी एक आधिकारिक कारण की स्पष्ट पुष्टि नहीं की गई है। कई सालों से विवादों में रही फिल्म ‘सतलुज’ की कहानी नई नहीं है, लेकिन इसका विवादों से रिश्ता काफी पुराना है। इस फिल्म का मूल नाम ‘Punjab ’95’ था। इससे पहले इसे ‘Ghallughara’ नाम से भी जोड़ा गया था। फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता Jaswant Singh Khalra के जीवन से प्रेरित बताई जाती है। फिल्म को पहली बार 2022 में प्रमाणन (Certification) के लिए भेजा गया था। इसके बाद यह लंबे समय तक CBFC की प्रक्रिया में अटकी रही। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म में बड़ी संख्या में बदलाव और कट लगाने की मांग की गई थी, जिसके चलते इसकी थिएटर रिलीज़ लगातार टलती रही। अंततः फिल्म ने सिनेमाघरों के बजाय OTT का रास्ता चुना। Zee5 से हटने के बाद क्या बोले दिलजीत दोसांझ? फिल्म हटाए जाने के बाद Diljit Dosanjh ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने एक संदेश में लिखा कि वे “अंधेरे को चुनौती देते हैं” और संकेत दिया कि ऐसी परिस्थितियां उन्हें अपनी कहानियां बताने से नहीं रोक सकतीं। उनकी इस प्रतिक्रिया को सोशल मीडिया पर व्यापक समर्थन मिला, जहां कई प्रशंसकों ने फिल्म को दोबारा उपलब्ध कराने की मांग की। सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस फिल्म हटने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर #Satluj और #Punjab95 ट्रेंड करने लगे। कई यूज़र्स ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देखा, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि पूरी स्थिति पर आधिकारिक स्पष्टता आने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। फिलहाल Zee5 ने केवल इतना कहा है कि वह इस मामले में आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं पर काम कर रहा है और भविष्य में फिल्म को दोबारा उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। क्या भारत में फिर से रिलीज़ होगी फिल्म? फिलहाल इस सवाल का कोई निश्चित जवाब नहीं है। फिल्म को दोबारा स्ट्रीम किया जाएगा या नहीं, यह संबंधित कानूनी और नियामकीय प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा। Zee5 ने संकेत दिया है कि वह फिल्म को वापस लाने के लिए प्रयासरत है, लेकिन अभी तक कोई नई रिलीज़ डेट घोषित नहीं की गई है। ‘सतलुज‘ विवाद: एक नज़र में फिल्मपहले ‘Punjab ’95’ नाम से बनाई गई थी। यहमानवाधिकार कार्यकर्ता Jaswant […]

इतिहास रच दिया! उत्तर प्रदेश ने जीता पहला Senior National Inter-state Athletics Team खिताब, 12 खिलाड़ी ASIAN Games के लिए Qualify!

उत्तर प्रदेश के खेल इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है! सीनियर नेशनल इंटर-स्टेट चैंपियनशिप (Senior National Inter-State Championships) में यूपी की एथलेटिक्स टीम ने अब तक का अपना सबसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए पहली बार मेन्स टीम ट्रॉफी (Men’s Team Trophy) पर कब्जा जमाया है। शानदार खेल की बदौलत उत्तर प्रदेश के 12 जांबाज […]

स्कूल में लाल पेन से लिखने पर क्यों पड़ती है डांट? 99% लोगों को नहीं पता इसकी असली वजह

क्या आपने कभी सोचा है कि स्कूल या कॉलेज में छात्रों को हमेशा नीले (Blue) या काले (Black) पेन से लिखने की सलाह दी जाती है, जबकि लाल (Red) पेन से लिखने पर अक्सर डांट पड़ती है? आखिर इसके पीछे क्या वजह है? क्या यह सिर्फ एक परंपरा है या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक और प्रशासनिक कारण भी छिपा है? आइए जानते हैं इस रोचक सवाल का जवाब। Join Telegram For Fast Update Join आखिर लाल पेन से लिखने की मनाही क्यों होती है? दरअसल, अधिकांश स्कूलों और कॉलेजों में लाल पेन का इस्तेमाल शिक्षकों के लिए आरक्षित माना जाता है। शिक्षक उत्तर पुस्तिकाओं की जांच, गलतियों को चिन्हित करने, अंक देने और जरूरी टिप्पणियां लिखने के लिए लाल स्याही का उपयोग करते हैं। इससे छात्रों और शिक्षकों की लिखावट आसानी से अलग पहचान में आ जाती है। नीला और काला पेन ही क्यों इस्तेमाल किया जाता है? नीले और काले रंग की स्याही सफेद कागज पर सबसे अधिक स्पष्ट दिखाई देती है। यही वजह है कि पढ़ने, फोटोकॉपी करने और दस्तावेजों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में ये दोनों रंग सबसे बेहतर माने जाते हैं। इसके अलावा कई परीक्षाओं में उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग की जाती है। ऐसे में गहरे नीले या काले रंग की स्याही मशीन द्वारा आसानी से पढ़ी जा सकती है, जबकि हल्के या अन्य रंगों की स्याही कई बार स्पष्ट नहीं दिखती। क्या लाल पेन इस्तेमाल करना नियम के खिलाफ है? दिलचस्प बात यह है कि भारत में ऐसा कोई सार्वभौमिक कानून नहीं है जो छात्रों को लाल पेन इस्तेमाल करने से रोकता हो। हालांकि, अधिकांश स्कूल, कॉलेज और परीक्षा संस्थान अपने-अपने नियम बनाते हैं और छात्रों से उनका पालन करने की अपेक्षा करते हैं। इसलिए लाल पेन से लिखने पर कई जगह मना किया जाता है। लाल रंग का मनोवैज्ञानिक असर भी है मनोवैज्ञानिकों के अनुसार लाल रंग को अक्सर गलती, चेतावनी, खतरे और सुधार का प्रतीक माना जाता है। जब किसी कॉपी में लाल रंग से निशान लगाए जाते हैं तो वे तुरंत ध्यान आकर्षित करते हैं। यही कारण है कि दुनियाभर के कई शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों द्वारा लाल पेन का उपयोग वर्षों से किया जा रहा है। क्या परीक्षा में किसी भी रंग का पेन इस्तेमाल कर सकते हैं? यह पूरी तरह परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था के नियमों पर निर्भर करता है। कई बोर्ड और विश्वविद्यालय केवल नीले या काले बॉल पेन से उत्तर लिखने की अनुमति देते हैं ताकि उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग और मूल्यांकन में किसी तरह की परेशानी न हो। परीक्षा देने से पहले हमेशा आधिकारिक निर्देश जरूर पढ़ें। निष्कर्ष स्कूलों में लाल पेन से लिखने पर डांट पड़ने का कारण सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि उत्तर पुस्तिकाओं की स्पष्ट जांच, स्कैनिंग, पहचान और मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी है। यही वजह है कि छात्रों को अधिकतर नीले या काले पेन का उपयोग करने की सलाह दी जाती है, जबकि लाल पेन शिक्षकों के लिए रखा जाता है।  For the latest update about Govt. Job, please follow our Facebook, Telegram, What’s app channel & Instagram