चांद से टकराया SpaceX का रॉकेट! आखिर क्यों खुश हैं वैज्ञानिक?
स्पेस साइंस की दुनिया में एक बेहद अनोखी घटना सामने आई है। SpaceX के Falcon 9 रॉकेट का इस्तेमाल किया जा चुका ऊपरी हिस्सा (Upper Stage) चंद्रमा से टकरा गया। यह कोई योजनाबद्ध मिशन नहीं था, बल्कि अंतरिक्ष में लंबे समय तक भटकने के बाद गुरुत्वाकर्षण के कारण यह हिस्सा चांद की सतह से जा टकराया। इस घटना को वैज्ञानिक एक दुर्लभ रिसर्च अवसर के रूप में देख रहे हैं। Join Telegram For Fast Update Join क्या हुआ? जनवरी 2025 में SpaceX ने Falcon 9 रॉकेट के जरिए दो लूनर लैंडर लॉन्च किए थे। मिशन पूरा होने के बाद रॉकेट का ऊपरी हिस्सा अंतरिक्ष में ही रह गया। लगभग डेढ़ साल तक पृथ्वी और चंद्रमा के बीच घूमने के बाद 5 अगस्त 2026 को यह चंद्रमा से टकरा गया। कितनी तेज थी टक्कर? रिपोर्ट्स के मुताबिक रॉकेट का यह हिस्सा करीब 8,700 किमी प्रति घंटे (लगभग 5,400 mph) की रफ्तार से चंद्रमा की सतह से टकराया। इस टक्कर से चंद्रमा पर लगभग 18 मीटर (60 फीट) चौड़ा नया क्रेटर बनने का अनुमान है। NASA क्यों कर रहा है इस घटना का अध्ययन? NASA और कई अंतरराष्ट्रीय वेधशालाएं इस टक्कर का अध्ययन कर रही हैं। वैज्ञानिक जानना चाहते हैं कि इतनी तेज कृत्रिम टक्कर से चंद्रमा की सतह पर क्या प्रभाव पड़ता है। इस रिसर्च से वैज्ञानिकों को मदद मिलेगी: चंद्रमाकी सतह (Lunar Soil) की संरचना समझने में हाई-स्पीडइम्पैक्ट के प्रभाव जानने में भविष्यके Artemis और अन्य Moon Missions की योजना बेहतर बनाने में अंतरिक्षमलबे (Space Debris) के प्रभाव का आकलन करने में क्या यह टक्कर पृथ्वी के लिए खतरनाक थी? बिल्कुल नहीं। यह घटना पूरी तरह चंद्रमा पर हुई और इससे पृथ्वी या लोगों को किसी भी प्रकार का खतरा नहीं था। हालांकि, यह घटना बढ़ते स्पेस जंक (Space Debris) की समस्या को जरूर उजागर करती है। क्या इस टक्कर को देखा जा सका? टक्कर का स्थान चंद्रमा के ऐसे हिस्से में था, जहां से इसे सीधे देखना मुश्किल था। हालांकि, चिली स्थित एक वेधशाला ने टक्कर के बाद उठे सोडियम और लिथियम गैस के प्लूम का पता लगाया, जिससे वैज्ञानिकों ने पुष्टि की कि रॉकेट वास्तव में चंद्रमा से टकरा गया। आने वाले दिनों में NASA के ऑर्बिटर इस स्थान की तस्वीरें लेकर विस्तृत जानकारी देंगे। यह घटना क्यों है खास? पहलीबार किसी ज्ञात SpaceX रॉकेट के हिस्से की चंद्रमा से टक्कर का इतना विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है। […]


























